जीवनशैलीविचार

संभल कर करें अपने सलाहकार का चुनाव

आज कल की दुनिया में इंसान को तरह तरह की समस्या हो सकती है और इन समस्याओं से निपटने के लिए इंसान मानसिक रूप से किसी न किसी पर निर्भर होता ही है , हमारे समाज में पहले से चली आ रही कहानियां और किस्से इन् बातों के प्रमाण प्रस्तुत करते हैं की एक सलाहकार अगर आपको अच्छी सलाह न दे सका और यदि आप उस पर आँख बंद करके भरोसा करते हैं तो यही सलाह आपके जीवन के लिए हानिकारक हो सकती है |
रामायण और महाभारत जैसे धर्म ग्रन्थ भी इन बातों को प्रमाणित करते हैं की सलाहकार का बुद्धिमान और निस्वार्थी होना अति आवश्यक है | जहाँ एक ओर रामायण में माता कैकेयी की बुद्धि को भ्रष्ट करने में मंथरा की अनुचित सलाह थी जिसमे स्वार्थ तो कैकेयी के पुत्र भरत की अच्छाई का था लेकिन वो अत्यंत ही धर्म विरुद्ध था और जिसके फलस्वरूप राम जैसे पुत्र को वनवास जाना पड़ा था तो वहीँ दूसरी ओर महाभारत में खुद दुर्योधन के मामा शकुनि ने अपनी ईर्ष्या और महत्वाकांक्षा के चलते इतना बड़ा युद्ध करवाने में अहम् भूमिका निभाई जिसका परिणाम था की इतिहास का सबसे भयावह युद्ध हुआ | लेकिन इतिहास हमें अच्छे सलाहकारों का भी उदाहरण देता है जिसमे स्वयं भगवान श्री कृष्ण , पांडवों के न सिर्फ सलाहकार थे बल्कि उनको युद्ध में विजय भी दिलवाई | एक अच्छा सलाहकार वही होता है जो आपको अच्छे और बुरे दोनों परिस्थितियों में धैर्य पूर्वक वो बातें समझाए जो न सिर्फ आपके हित की हों अपितु वो सब प्रकार से सही और किसी को दुःख देने वाली न हों | सही और गलत का चयन हर एक प्राणी अपने नज़रिए से करता है लेकिन समझदार वही है जो हर नज़रिए को समझता है और उसी प्रकार व्यवहार करता है | कालांतर में चाणक्य जैसे गुरु ने भी अपनी ज्ञान ज्योति से चन्द्रगुप्त मौर्य को एक सम्राट बनने में अहम् भूमिका अदा की | जहाँ एक तरफ सलाहकार आपको अनुचित सलाह से समूल रूप से नष्ट कर देते हैं वहीँ दूसरी तरफ एक अच्छा सलाहकार उचित सलाह से आपके जीवन में खुशियां लाने में आपकी मदद भी करता है | बेशक सलाहकार आपका बहुत घनिष्ट हो सकता है और आपको वो बातें बतलाए जो आपके भले की हो सकती हैं लेकिन वो सही हैं या नहीं इसका चुनाव आपको स्वयं भी करना चाहिए | यह आवश्यक नहीं की आपसे सबसे ज्यादा प्रेम करने वाला व्यक्ति ही वही व्यक्ति है जो आपके जीवन के निर्णय लेने में सबसे उपयुक्त है | कभी कभी हमारे अपने प्रेम भाव में स्वार्थ निहित होकर हमें ऐसी बातें समझा जाते हैं जो की हमारे लिए दीर्घकालिक हानिकारक होती है और जिसका असर हमारे भविष्य पर पड़ता है लेकिन जो बातें निःस्वार्थ रूप में और सही और गलत की पहचान के साथ हमें बताई जाए जिसमे सब तरफ सिर्फ ख़ुशी छुपी हो , वही हमारे जीवन में खुशियां ला सकती हैं इसलिए सलाहकार को हमेशा ये बात याद रखनी चाहिए की यदि उचित ज्ञान न हो तो अपनी सलाह न ही दे और उस व्यक्ति को सही रास्ता और सही व्यक्ति के पास भेज दे यदि वो खुद में असमर्थ है कोई भी रास्ता दिखाने में ,बात चाहे छोटी हो या बड़ी यदि आप ये निर्णय लेने में असमर्थ हैं की परिस्थिति विशेष में आपको क्या करना चाहिए तो फिर आपको बहुत सजग होकर अपने प्रियजन या इष्टमित्र से अपने मन की बात कहना चाहिए और उसको अमल में लाने से पहले स्वयं भी सोचना चाहिए की वो सुझाव आपके लिए कितना उपयुक्त है |

टीम जनआवाज़

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